जख्म
अपनो ने ऐसा जख्म दिया
हम तो दंग रह गये।
क्या करे और क्या ना करे
हमारी समज मे न कुछ आये।।
अपनो की जख्म हुआ मन को
दिल मे भी दर्द हो गया।
धडकन बढ गयी है
अब भी काबू मे नही आया।।
ऐसा दिया जोर का झटका
विज का झटका भी कम है।
घायल कर दिया मन को
अभी जिंदगी बहूत बाकी है।।
माना था उसको अपना
क्षण मे वो बदल गया।
ऐसी कैसी मुसिबत थी
मौन छोडकर निकल गया।।
आती है उसकी याद
पर कुछ न कर सकता।
वो तो निकल पडे
मेरे हात मे कुछ नही था।।
क्या कहू कैसे कहू
कहने को क्या बाकी रहा।
मन को रखना पडेगा काबू
नही तो जाके बैठेगा वहा।।
प्रा. दगा
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